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Monday, January 22, 2018

ठंड का मौसम और कुशीनगर (गुड़, महिया, गन्ने)

जी हाँ, अगर ठंड (जाड़ा) के मौसम में आप कुशीनगर (भगवान बुद्ध की परिनिर्वाण स्थली) के दर्शन हेतु जाते हैं तो याद रखें, गर्म कपड़े जरूर पहने रहें। जी हाँ, जाड़े में यहाँ काफी ठंड पड़ती है और कुहासे के कारण पास की ही वस्तुएँ बहुत कठिनाई से दिखती हैं। आप स्वेटर, कोट के साथ ही सर पर कनटोप जरूर पहनें और मफलर से भी कान को बाँध कर रखें।
ठंड के मौसम में कुशीनगर भी थोड़ा सुस्त हो जाता है पर ठंड में कुशीनगर दर्शन एक अद्वितीय, अप्रतिम, अलौकिक दर्शन, भ्रमण का परमानंद दे जाता है।


ठंड में जाते हैं तो गरमागरम समोसे और चाय का आनंद जरूर उठाएँ।
(विदेशी सैलानियों के साथ ही गरम समोसे का आनंद उठाते हुए गोलू, सोनू, राज व प्रभात)






विदेशी सैलानियों के साथ ही गरम समोसे का आनंद उठाते हुए गोलू, सोनू, राज व प्रभात




























मार्ग खाली दिखे तो किनारे की पटरी पर थोड़ा दौड़कर भी शरीर को गरम किया जा सकता है।







देवरिया कसया मार्ग पर कुशीनगर मोड़ पर आप गरमा-गरम गुड़, महिया और साथ ही चाहें तो गन्ने का भी आनंद उठा सकते हैं।
गरमा-गरम गुड़








































वैसे ठंड के मौसम में गरमा-गरम चाय पीने का भी आनंद उठाया जा सकता है।



तो कुछ और चित्रों के साथ मैं अपनी लेखनी को विराम देता हूँ....फिर मिलेंगे। जय-जय।





रामाभार स्तूप















बुद्ध सरोवर




















एक दुकान पर गरम चाय की राह देखते






















जय-जय...फिर मिलेंगे....कुछ और जानकारी और नवीनतम छायाचित्रों के साथ।


Tuesday, July 5, 2016

कुशीनगर - भगवान बुद्ध की परिनिर्वाण स्थली की झलक (छायाचित्र के माध्यम से)




देवरिया - कसया (कुशीनगर) मार्ग

 (देवरिया-कसया रोड पर कुशीनगर मोड़ पर)

रामाभार स्तूप





बौद्धभिक्षु

कुशीनर (मेन रोड पर दुकानें)

कुशीनगर मेन रोड




लॉफिंग बुद्धा




















कसया-देवरिया मार्ग

रामकोला धाम (कुशीनगर)


श्री केशव मोहन पांडेय जी हिंदी एवं भोजपुरी के एक माने-जाने लेखक हैं। इस धाम के बारे में वे बता रहे हैं-

वाह! अद्भुत है रामकोला का यह धाम

कुशीनगर में एक भव्‍य मंदिर है। इस मंदिर की खासियत है कि यह शिवलिंग का आकार लिए हुए पांच मंजिल ऊंचा बना है। यहां सभी धर्मों के महापुरुषों और देवी-देवताओं की मूर्तियां स्‍थापित है। यह मंदिर अनुसुइया महाराज भगवानानंद स्वामी के सपनों का आध्यात्मिक संगम है। पर्यटक कहते हैं कि यहां आने से उन्‍हें उन्‍हें सुख, शांति और मन को अत्‍यधिक प्रेरणा मिलती है। यहां आने के बाद मन की हर मुराद पूरी होती है। 

मन मोह लेता इस मंदिर का स्‍वरूप। इस मंदिर को देखने के बाद यही लगता है मानो कोई पांच मंजिला ऊंचाई का शिवलिंग खड़ा हो। इसे पांच तल में बांटा गया है। हर तल की अपनी अलग खासियत है। किसी तल में सिर्फ महापुरुषों की प्रतिमाएं तो किसी में देशभक्‍त और महान योद्धा। पांचवें तल को सबसे खास और अहम बनाया गया है। वैसे तो हर तल की अपनी अलग खासियत और एक अद्भुत इतिहास है। 

पहला तल: शिवलिंग के आकार के बने इस मंदिर के प्रथम तल में ज्ञान गुफा है। यहां महान संत स्वामी सत्संगी महाराज लंगड़ा बाबा की मूर्ति स्थापित है। इसके बगल में भगवानानंद महाराज के पूर्व जन्म की अस्थियां भी रखी हैं। 

दूसरा तल: यहां भारतीय संस्कृति के विख्यात संत अत्रि ऋषि की पतिव्रता पत्नी महासती अनुसुइया माता का भव्य मंदिर है। इसके चारों ओर नौ दुर्गा की मूर्तियां हैं। इसमें नारी शक्ति को प्रदर्शित करने वाली भारत की महान नारियों की प्रतिमाएं और उनके उपदेश लिखित हैं। इसमें मुख्‍य रूप से रानी दुर्गावती, लक्ष्मीबाई, जीजाबाई, भगिनि निवेदिता, बसरा की मशहूर तपश्विनी राबिया, इटली की मशहूर सेंट कैथसि और सती सावित्री की मूर्तियां स्थापित हैं।

तीसरा तल: यहां भारत और विश्व के सभी महान संतों स्वामी विवेकानंद, चैतन्य महाप्रभु, देवर्षि नारद, साईं बाबा, राम कृष्ण परमहंस, महर्षि वेद व्यास, महर्षि बाल्मीकि, गुरु नानक देव, संत ज्ञानेश्वर महाराज और भक्त प्रह्लाद जैसे महान संतों की मूर्तियां स्थापित हैं। 

चतुर्थ तल: यह तल भी महान संतों की मूर्तियों और उनके उपदेशों से सुशोभित है। इसमें संत फ्रांसिस, संत अफलातून (सुकरात), यूनान के ब्रह्मज्ञानी महात्मा डायोजिनिश, संत कंफ्यूशियस, डॉ. मार्टिन लूथर, दाराशिकोह (मुगल बादशाह शाहजहां के बड़े बेटे), फकीर मंसूर अली, हजरत मूसा, सुल्‍तान मुल्लाह साह, फकीर महात्मा शाम्सतखेज की मूर्तियां स्थापित हैं। 

पांचवां तल: इस तल को कैलाशपुरी भी कहते हैं। इसके प्रवेश द्वार पर भारत के दो महान योद्धा और देशभक्त शिवाजी और महाराणा प्रताप की विशाल मूर्तियां स्थापित हैं। मुख्य भाग में जो गुंबद है वहां भगवान शंकर के शोक स्वरूप की मूर्तियां स्थापित हैं। गुंबद के चारों ओर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग स्थापित किए गए हैं।


Tuesday, July 29, 2008

बुद्ध शरणम् गच्छामि, धम्मम शरणम् गच्छामि....


सादर अभिनन्दन,

प्रभाकर गोपालपुरिया एक नया चिट्ठा, 'कुशीनगर' लेकर हाजिर है। इस चिट्ठे के माध्यम से आप सबको भगवान बुद्ध की परिनिर्वाण स्थली कुशीनगर से परिचित कराया जाएगा। आज कुशीनगर उत्तर-प्रदेश के एक जनपद के रूप में भी आसीन है।
विश्व में भारत का नाम सुविख्यात करनेवाली गौतम बुद्ध की यह नगरी बहुत ही प्राचीन है। आज विश्व के प्रसिद्ध धार्मिक एवं ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में से यह एक है।
बुद्ध शरणम् गच्छामि, धम्मम शरणम् गच्छामि.......

प्रभाकर पाण्डेय
 
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